Giloy Satva Uses, Benefits in hindi: गिलोय सत्व के फायदे और नुकसान

गिलोय अथवा गुडूची (Tinospora cordifoliya) जिसको आयुर्वेद में अमृता भी कहते हैं, जिसका अर्थ होता है "दिव्य अमृत"। यह रस में तिक्त (कड़वा) व कषाय (कसैला) होता है। गिलोय को गुडूची, मधुपर्णी, अमृता, रसायनी आदि नामों से भी जाना जाता है।


आयुर्वेद में इसे रसायन (जड़ी बूटी जो जीवन शक्ति को बढ़ाती है), मेध्य (जड़ी बूटी जो बुद्धि और स्मृति को बढ़ाती है) कहा गया है। यह हमारे तीनों दोषों वात, पित्त, कफ को शांत कर स्वास्थ्य में वृद्धि करता है।

आयुर्वेद में गिलोय का उपयोग मुख्य रूप से ज्वर (बुखार), पाचन शक्ति को बढ़ाने के लिए जाता है। इसके अतिरिक्त या हमारी रोग प्रतिरोधक शक्ति (Immunity) को बढ़ाता है।


What is giloy satva in hindi ? गिलोय सत्व क्या है ?


गिलोय सत्व चूर्ण एक आयुर्वेदिक औषधि है, जिसे गिलोय ( Tinospora cordifoliya) पौधे के तने वाले भाग से प्राप्त किया जाता है। इसे गुडूची सत्व अथवा अमृता सत्व भी कहते हैं। अमृता का अर्थ होता है "दिव्य अमृत" गिलोय के स्वास्थ्यवर्धक गुणों के कारण इसे आयुर्वेद में अमृता कहा गया है।


गिलोय सत्व मुख्य रूप से गिलोय के तने से बनाया जाता है, लेकिन गिलोय की जड़ तथा पत्तों को भी औषध रूप में प्रयोग किया जाता है।


गिलोय सत्व का उपयोग आयुर्वेद में वात, पित्त दोषों को शांत करने के लिए किया जाता है, तथा इन दोषों से उत्पन्न होने वाले विकार जैसे- पैरों की जलन (Burning sensation on feet) , बुखार, रक्त विकार, वातरक्त (Gout) , पीलिया (Jaundice), डायबिटीज इत्यादि में उपयोग किया जाता है।

Giloy Satva churna

इनके अतिरिक्त अमृता सत्व का उपयोग आयुर्वेद में पित्त शामक , वृष्य (कामोद्दीपक), शुक्रल (Increases sperm count) दीपन ( जठराग्नि को प्रदीप्त करता है), पाचन (भोजन का पाचन करता है व कब्ज को दूर करता है), दाहहर( जलन को दूर करता है), श्वास व कास हर , बल्य ( शरीर को बल देता है), संग्रहणी (डायरिया), कामला ( पीलिया), कुष्ठ हर, वातरक्त (Gout), आम हर (कब्ज), ज्वरहर (बुखार), हृद्य (हृदय के लिए लाभदायक), मूत्र प्रदाह (मूत्र में जलन), अपस्मार (Epilepsy) आदि में उपयोग किया जाता है।


सत्व क्या है What satva in hindi ?


किसी भी द्रव्य के सार अंश (Extract) को सत्व कहते हैं, आयुर्वेद में विभिन्न औषधीय द्रव्यों के सत्व (Extract) को औषधीय प्रयोग के लिए उपयोग किया जाता है। सत्व दो प्रकार से बनाया जाता है, आग में उबालकर जैसे गिलोय घनवटी अथवा बिना उबाले जैसे-अमृता सत्व (गिलोय सत्व)।


गिलोय सत्व के फायदे- Giloy satva benefits in hindi


बुखार में उपियोगी - Guduchi Satva benefits for fever in Hindi


गिलोय सत्व के ज्वरनाशक गुणों के कारण यह आयुर्वेद में मुख्य रूप से बुखार (Fever) के लिए प्रयोग किया जाता है। यह हमारे शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करता है, इसके साथ-साथ यह अन्य रोगों के संक्रमण से भी बचाता है। गिलोय सत्व हमारे प्लेटलेट्स काउंट को भी बढ़ाता है। यह उत्तम ज्वरनाशक होने के कारण डेंगू ,मलेरिया, स्वाइन फ्लू, आदि बीमारियों में भी उपयोगी है।


पाचन शक्ति को बढ़ाता है - Giloy benefits for digestion in Hindi


गिलोय सत्व हमारी पाचन शक्ति को ठीक करने में मदद करता है, यह अपच व कब्ज को दूर करता है, भूख बढ़ाता है, और शरीर में पोषक तत्वों के बेहतर अवशोषण को बढ़ावा देता है। गिलोय सत्व चूर्ण को आंवले के साथ लेने से कब्ज तथा अपच जैसी समस्या दूर हो जाती है, इसके अतिरिक्त गिलोय बवासीर मानसिक चिंता जैसी समस्याओं को भी दूर करता है।

मधुमेह में उपयोगी - Giloy Satva benefits for diabetes in Hindi


नियमित रूप से गिलोय सत्व का उपयोग करने से यह डायबिटीज जैसी समस्या को भी दूर करता है, यह इन्सुलिन स्राव को नियमित कर हमारे रक्त शर्करा के उच्च स्तर को कम करने करने में मदद करता है।

एक समकालीन अध्ययन भी मधुमेह विरोधी एजेंट के रूप में गिलोय के उपयोग का समर्थन करता है।


गिलोय सत्व को एलोवेरा जूस के साथ लेने से यह हमारे रक्त को शुद्ध करता है, तथा विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है।


इम्यूनिटी को बढ़ाता है- Giloy satva benefits for immunity in hindi


गिलोय सत्व हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण कार्य करता है। यह हमें अनेक रोगों के संक्रमण से भी बचाता है। गिलोय के एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-माइक्रोबियल गुण शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता जिससे लिवर किडनी आदि सुचारू रूप से कार्य करते हैं। एक उत्तम ज्वरनाशक होने के कारण यह हमें बुखार डेंगू मलेरिया आदि रोगों से भी बचाता है। इम्यूनिटी बदने के लिए गिलोय चूर्ण नियमित रूप से लिया जा सकता है।


दर्द कम करने में सहायक Giloy satva benefits for pain relief in hindi


यह शोथहर (Anti inflammatory) होने के साथ-साथ दर्द कम करने में भी सहायक है,यह गठिया (Arthritis) वातरक्त (Gout) आदि में दर्द से राहत देता है। घाव को भरने के लिए या दर्द कम करने के लिए गिलोय का पेस्ट भी सीधे तो जा पर लगाया जा सकता है।


चिंता व तनाव दूर करता है - Giloy Satva benefits for Anxiety and stress in Hindi


गिलोय सत्व चिंता, मानसिक तनाव, थकान जैसी समस्याओं दूर करने में भी सहायक है। इसके साथ-साथ इसके साथ साथ यह हमारी बुद्धि, स्मृति तथा एकाग्रता को भी बढ़ाता है। तनाव दूर करने और याददाश्त बढ़ाने के लिए गुडूची (गिलोय) चाय भी फायदेमंद है।


हृदय के लिए हितकर Giloy satva benefits heart in hindi


हृद्य (हृदय के लिए हितकर ) होने के कारण स्वस्थ हृदय प्रणाली को बनाए रखने के लिए गिलोय सत्व पाउडर बेहद प्रभावी है। जो हमारे शरीर को बल देता है, हमारे रक्त को शुद्ध करने का कार्य करता है जिससे अशुद्ध पदार्थ रक्त से बाहर निकल जाते हैं।


गिलोय की एंटीऑक्सीडेंट प्रकृति हृदय की मांसपेशियों को मजबूत बनाने और रक्त वाहिकाओं में लिपिड के निर्माण को रोकने में मदद करती है। और इसलिए दिल के दौरे, रक्त के थक्कों आदि के जोखिम को कम करती है। यह रक्त में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


त्वचा के लिए उपियोगी - Giloy satva benefits for skin in hindi


गिलोय में एंटी एजिंग गुण होते हैं जिसके कारण गिलोय सत्व त्वचा के लिए भी लाभदायक है, एलर्जी की स्थिति के कारण काले धब्बे, पिंपल्स, एक्जिमा, मुँहासे, धूप की कालिमा आदि में खुजली की सनसनी को कम करती है।


आंखों के लिए उपयोगी - Giloy satva benefits for eyes in hindi


गिलोय सत्व मित्र विकारों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह हमारी आंखों को बल देता है, इसका का निरंतर उपयोग करने से यह हमारी आंखों की दृष्टि क्षमता को बढ़ाता है तथा बिना चश्मे के देखने में मदद करता है।


गिलोय सत्व और इसके कई औषधीय उत्पाद ऑनलाइन खरीदने के लिए उपलब्ध हैं


रक्त विकारों में लाभदायक Giloy satva benefits bleeding disorders in hindi


गिलोय सत्व रक्त विकारों जैसे रक्त स्राव आदि में भी उपयोगी है, यह शरीर में प्लेटलेट्स काउंट को बढ़ाता है जिससे - नाक से खून बहना, बवासीर, अल्सरेटिव कोलाइटिस आदि जैसी बीमारियों को दूर करने में गिलोय का सत्व बेहद उपयोगी है।

त्रिदोष पर प्रभाव Giloy satva effect on tridosha in hindi


गिलोय रस (Taste) में तिक्त (कड़वा), कषाय (कसैला) होता है, और पाचन के पश्चात इसका प्रभाव मीठा होता है। यह हमारे तीनों दोषों (वात, पित्त, कफ) को शांत करता है। यह घृत के साथ वात , चीनी के साथ पित्त , शहद के साथ कफ विकारों में दिया जाता है । यह हमारे तीनों दोषों को संतुलित रखने के साथ- साथ शरीर को बल देता है व पुष्ट करता है।


गिलोय सत्व के अन्य उपयोग - Other use of giloy satva in hindi


  • एलोवेरा जूस के साथ गिलोय पाउडर को लेने से यह हमारे रक्त को शुद्ध करने के साथ-साथ विषाक्त पदार्थों को बाहर निकलता है।

  • आमला के रस के साथ गिलोय सत्व पाउडर का उपयोग करने से यह कब्ज से राहत देता है।

  • गठिया में घी के साथ गुडूची पाउडर का उपयोग किया जाता है।

  • स्पर्म काउंट बढ़ाने के लिए नियमित रूप से गिलोय पाउडर का इस्तेमाल फायदेमंद है।

  • गिलोय पाउडर को एरण्‍ड तेल के साथ गाउट के इलाज के लिए किया जाता है।


गिलोय सत्व के नुकसान - Side effects of giloy satva in hindi


गिलोय सत्व का कोई भी साइड इफेक्ट ज्ञात नहीं है, यदि आप कुछ अन्य दवाइयों का सेवन पहले से कर रहे हैं, तो गिलोय सत्व को लेने से पहले आपको आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए, इसकी अधिक मात्रा में सेवन करने से यह रक्त शर्करा के स्तर में अचानक गिरावट का कारण हो सकता है, जो हानिकारक हो सकता है।

जिन व्यक्तियों को लो ब्लड शुगर की समस्या है, उन्हें इसका इसका निरंतर इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।


मात्रा (dose) -


250 से 500 मिलीग्राम शहद से साथ डायबिटीज, पैरों की जलन, बुखार तथा पित्त दोष को शांत करने के लिए लिया जा सकता है।


गिलोय सत्व (चूर्ण) केसे बनाएँ - how to make giloy Satva powder in hindi

घटक द्रव्य -


मुख्य घटक - ताजा गिलोय का तना व तने के भार का लगभग 4 गुना जल।


संदर्भ श्लोक -


गुडूचीं खण्डश: कृत्वा कुट्टयित्वा सुमर्दयेत् ।

वस्त्रेण विधृतं तोयं स्रावयेत्तच्छनै: शनै: ॥

शुद्धशङ्खनिभं चूर्णमेतै: सम्मिश्रयेद्भिषक् ।


विधि (Process)-


सबसे पहले ताजी गिलोय के तने को लेकर पानी से धोकर कर उसके छोटे-छोटे टुकड़े करें , फिर इन टुकड़ों को कूटकर बारीक करें, इसके बाद एक स्टैनलेस स्टील के बर्तन में डालकर गिलोय के भार का लगभग 4 गुना पानी डालें तथा हाथों से अच्छी तरह मसलें । इस तरह गिलोय का सार अंश (स्टार्च) पानी में आ जाता है। इसके बाद कुटे हुये गुडूची (गिलोय) को बर्तन में अच्छी तरह से निचोड़कर कर फेंक दें । इसके बाद गिलोय के पानी को किसी छन्नी या कपड़े से छानकर दूसरे बर्तन में डालें, अब इस बर्तन में इकट्ठा किए गए गिलोय के पानी को लगभग 10 से 12 घंटे तक स्थिर छोड़ दें, इससे गिलोय का सत्व (Extract) बर्तन की तली पर जमा हो जाता है।


अब बर्तन (10 से 12 घंटे बाद ) को हिलाए बिना उसके ऊपर के पानी को दूसरे बर्तन में निथारें । और बर्तन के की तली पर जमा हुए मैदे जैसे पदार्थ (गिलोय सत्व) को इकट्ठा कर धूप में सुखाएं, धूप में सुखाने के बाद चोर जैसा गुडूची सत्व प्राप्त हो जाता है।


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